परिवर्तन प्रकृति का नियम है | इस जगत में प्रत्येक जीव को किसी भी कारण से परिवर्तनीय स्थिति से गुजरना ही पड़ता है | महापुरुषों का कथन है — परिवर्तन जीवन का एक आवश्यक अंग है और इसका सहजतापूर्वक स्वीकार किया जाना चाहिए | अत: हम कह सकते है कि परिवर्तन ही जीवन का यथार्थ है | यह बिना अपवाद सभी पर कार्य करता है; उनकी इच्छा से, अनिच्छा से, सहमति के साथ या उसके बगैर |

‘कोरोना काल’ ने तो हमें सही मायने में परिवर्तन का मतलब समझाया है | इस स्थिति ने समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था तथा सामाजिक स्तर को अत्यंत प्रभावित किया लेकिन, जो हार माने, वह मनुष्य नहीं क्योंकि मनुष्य में सोचने की क्षमता तथा तर्क करने की अद्भुत शक्ति होती है | मानो ईश्वर से मिला हुआ अनोखा वरदान ही है यह ! इस तरह की विकट स्थिति में भी उसने विचलित हुए बिना कठिनाइयों का सामना किया | मनुष्य ने कभी हार नहीं मानी यह कथन सच है क्योंकि वह या तो जीतता है, या कुछ सीखता है | यही यथार्थ है | यही कारण है, ‘पाषाण युग’ से लेकर ‘आधुनिक युग’ तक मनुष्य ने हर समस्या का हल ढूँढने का सफल प्रयास कर विजय हासिल की है | कभी मानव निर्मित तो कभी प्रकृति निर्मित परिवर्तन तो आते ही रहेंगे‌ किंतु मनुष्य इसी तरह व्यक्तिगत एवं सामाजिक परिवर्तन को सहज रूप से स्वीकार कर, विजय के पथ पर हमेशा अग्रसर होता
रहेगा | वह कभी हार माननेवालों में से नहीं है, बल्कि हार पहनकर सम्मान का अधिकारी होना ही उन्हें शोभा देता है | ऐसे महापुरुषों के प्रति समाज हमेशा कृतज्ञता का भाव व्यक्त करता है |

परिवर्तन ही ‘मनुष्य को मनुष्यता’ के निकट ले आता है | जीवनमूल्यों की सीख देता है | आशा की नई उमंग जगाता है, उम्मीदों की रोशनी बिखेरता है | सभी के जीवन को नई दिशा देनेवाले इस परिवर्तन रुपी उपहार को अपनाकर आगे बढ़ेंगे,तो विजयश्री प्राप्ति निश्चित है | विजयी भव !

सीखा हमने इस जीवन में ,
वर्तन-परिवर्तन का अंतर |
संदेह नहीं ज़रा भी मन में,
अपनाएँगे इसे निरंतर ||

मेघा परदेशी